Friday, 19 April 2013

ग़ज़ल 1 9 6 ( आबरू तार तार ख़बरों में ) - लोक सेतिया "तनहा"

आबरू तार तार खबरों में - लोक सेतिया "तनहा"

आबरू तार तार ख़बरों में ,
आदमी शर्मसार ख़बरों में।

शहर बिकने चला खरीदोगे ,
लो पढ़ो इश्तिहार ख़बरों में।

नींद क्या चैन तक गवा बैठे ,
लोग सब बेकरार ख़बरों में।

देख सरकार सो गई शायद ,
मच रही लूट मार ख़बरों में।

आमने सामने नहीं लड़ते ,
कर रहे आर पार ख़बरों में।

झूठ को सच बना दिया ऐसे ,
दोहरा बार बार ख़बरों में।

नासमझ कौन रह गया तनहा ,
सब लगें होशियार ख़बरों में।

No comments: