Wednesday, 24 April 2013

ग़ज़ल 1 9 2 ( आज हर झूठ को हरा डाला ) - लोक सेतिया "तनहा"

आज हर झूठ को हरा डाला - लोक सेतिया "तनहा"

आज हर झूठ को हरा डाला ,
आईना सच का जब दिखा डाला।

बन गये कुछ , लगे उछलने हैं ,
आपने आस्मां बता डाला।

आपके सामने बसाया था ,
घर हमारा तभी जला डाला।

धर्म वालो कहो किया क्या है ,
हर किसी को ज़हर पिला डाला।

जिसपे दीवार को चुना इक दिन ,
आज पत्थर वही हटा डाला।

मुस्कुराये लगे हमें कहने ,
आपके प्यार ने मिटा डाला।

आज देखा उदास तनहा को ,
रुख से परदा तभी हटा डाला।

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