Monday, 1 April 2013

ग़ज़ल 1 9 1 ( लोग जब मुहब्बत पर ऐतबार कर लेते ) - लोक सेतिया "तनहा"

लोग जब मुहब्बत पर ऐतबार कर लेते - लोक सेतिया "तनहा"

लोग जब मुहब्बत पर ऐतबार कर लेते ,
साथ जीने मरने का तब करार कर लेते।

इश्क में किसी को अपना कभी बना लेते  ,
इस तरह खिज़ाओं को खुद बहार कर लेते।

नाख़ुदा नहीं होते हर किसी की किस्मत में ,
हौसला किया होता, आप पार कर लेते।

लौटकर भी आना है ,आपको यहां वापस ,
आप कह गए होते , इंतज़ार कर लेते।

प्यार के बिना लगती ज़िंदगी नहीं प्यारी ,
इश्क जब है हो जाता ,जां निसार लेते।

हम भला कहें कैसे ,हम हुए तेरे आशिक  ,
नाम मजनुओं में कैसे शुमार कर लेते।

एक बार ख़त लिखकर , इक जुर्म किया तनहा ,
गर जवाब मिल जाता , बार बार कर लेते।

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