Wednesday, 20 February 2013

ग़ज़ल 1 7 6 ( हो गया क्यों किसी को प्यार है ) - लोक सेतिया "तनहा"

हो गया क्यों किसी को प्यार है - लोक सेतिया "तनहा"

हो गया क्यों किसी को प्यार है ,
बस इसी बात पर तकरार है।

कौन आकर हमारे ख़्वाब में ,
खुद बुलाता हमें उस पार है।

कुछ खबर तक नहीं हमको हुई ,
जुड़ गया दिल से दिल का तार है।

धर्म के नाम पर दंगे हुए ,
जल गया आग में गुलज़ार है।

रोग जाने उसे क्या हो गया ,
चारागर लग रहा बीमार है।

हर कदम डगमगा कर रख रही ,
चल रही इस तरह सरकार है।

शर्त रख दी थी "तनहा" प्यार में ,
कर दिया इसलिये इनकार है। 

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