Saturday, 5 January 2013

अपराधी महिला जगत के ( कविता ) 7 8 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

आप ,
हां आप भी ,
शामिल हैं ,
महिलाओं के विरुद्ध ,
बढ़ रहे अपराधों में ,
किसी न किसी तरह ।
आप जो ,
अपने ,
कारोबार के लिये  ,
प्रसाधनों के ,
प्रचार के लिये  ,
प्रदर्शित करते है ,
औरत को ,
बना कर ,
उपभोग की एक वस्तु ।     
आपकी ,
ये विकृत मानसिकता ,
जाने कितने और लोगों को ,
करती है प्रभावित ,
एक बीमार सोच से !!
जब भी ऐसे लोग करते हैं ,
व्यभिचार ,
किसी बेबस अबला से ,
होते हैं आप भी ,
उसके ज़िम्मेदार !!
आपके टी वी सीरियल ,
फ़िल्में आपकी ,
जब समझते हैं  ,
औरतों के बदन को ,
मनोरंजन का माध्यम ,
पैसा बनाने ,
कामयाबी ,
हासिल करने के लिये  ,
लेते हैं सहारा बेहूदगी का ,
क्योंकि नहीं होती ,
आपके पास ,
अच्छी कहानी ,
और रचनात्मक सोच ,
समझ बैठे हैं फिल्म बनाने ,
सीरियल बनाने को ,
सिर्फ मुनाफा कमाने का कारोबार।
क्या परोस रहें हैं  ,
अपने समाज को ,
नहीं आपको ज़रा भी सरोकार !!
आप हों अभिनेत्री ,
चाहे कोई माडल ,
कर रही हैं क्या आप भी ,
सोचा क्या कभी ,
थोड़ा सा धन कमाने को  ,
आप अपने को दिखा  रही हैं  ,
अर्धनग्न  ,
सभ्यता की सीमा को ,
पार करते हुए ,
आपको अपनी वेशभूषा ,
पसंद से ,
पहनने का पूरा हक है ,
मगर पर्दे पर ,
आप अकेली नहीं होती ,
आपके साथ सारी नारी जाति ,
का भी होता है सम्मान ,
जो बन सकता है अपमान ,
जब हर कोई देखता है ,
बुरी नज़र से ,
आपके नंगे बदन को ,
आपका धन या ,
अधिक धन ,
पाने का स्वार्थ ,
बन जाता है  ,
नारी जगत के लिए शर्म।
ऐसे दृश्य कर सकते हैं  ,
लोगों की ,
मानसिकता को विकृत ,
समाज की ,
हर महिला के लिये  !!
हद हो चुकी है ,
समाज के पतन की ,
चिंतन करें अब ,
कौन कौन है गुनहगार !!

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