Sunday, 6 January 2013

ग़ज़ल 7 8 ( सब के वादों का न ऐतबार करो )

सब के वादों का न एतबार करो ,
उनके आने का न इंतज़ार करो !
कुछ नहीं मिलता यहां वफ़ा करके ,
तुम खता ऐसी न बार बार करो !
उसने पूछा था बड़ी अदा से कभी ,
कह दिया हमने ,हमें न प्यार करो !
धड़कनों पर ही न इख्तियार रहे ,
इतना तो दिल को न बेकरार करो !
भर के बाहों में उसे था चूम लिया ,
यूं तो ख़्वाबों को न गुनाहगार करो !
बेवफा अहले जहां हुआ "तनहा" ,
तुम वफाएं अब न बार बार करो !

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