Monday, 7 January 2013

ग़ज़ल 172 ( तुम सिखाते रहे दोस्ती )

तुम सिखाते रहे दोस्ती ,
लोग बनते गए अजनबी !
आज हमसे मिले आप जब ,
मिल गई तब हमें ज़िंदगी !
आपने क्या ये जादू किया ,
लूट दिल ले गई सादगी !
हाल ऐसा हमारा हुआ ,
दूर होकर हुए पास भी !
हम मिलेंगे कभी तो कहीं ,
देखनी बस है दुनिया वही !
तुम न होना कभी अब जुदा ,
हमसे वादा करो तुम यही !
आ भी जाओ खुला दर मेरा ,
इक यही बात "तनहा" कही !

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