Friday, 18 January 2013

ग़ज़ल 1 2 6 ( बात पूछो न हम अदीबों की )

बात पूछो न हम अदीबों की ,
खाक उड़ जाएगी उमीदों की !
मत चढ़ाना किसी को सूली पर ,
बस यही आरज़ू सलीबों की !
दौलतों से ख़ुशी नहीं मिलती ,
बात झूठी नहीं फकीरों की !
आ गये छोड़ कर पहाड़ों को ,
छांव देखी नहीं चिनारों की !
याद अब तक बहुत सताती है ,
दिलरुबा की हसीं अदाओं की !
बात मेरी भी आज कुछ सुन लो ,
फिर सज़ा दो मुझे गुनाहों की !
चल कहीं और अब चलें "तनहा" ,
जल रही है चिता वफ़ाओं की ! 

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