Wednesday, 9 January 2013

ग़ज़ल 1 0 5 ( क्या बताएं हम खुदा क्या है )

क्या बताएं हम ख़ुदा क्या है ,
मिल न पाये गर खता क्या है !
सुन लिया सारे ज़माने ने ,
अब छुपाने को बचा क्या है !
है बहुत मुश्किल समझ पाना ,
हुस्न वालों की हया क्या है !
सब लुटाया प्यार में लोगो ,
हम से अब पूछो वफ़ा क्या है !
मर्ज़ बढ़ता जा रहा हर दिन ,
चारागर इसकी दवा क्या है !
लग रहा सब कुछ यहां बदला ,
कुछ हुआ तो है ,हुआ क्या है !
साथ जीना साथ मर जाना ,
और "तनहा" इल्तिजा क्या है !

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