Sunday, 20 January 2013

ग़ज़ल 1 0 0 ( अब हर किसी को अपना बताने लगे हैं )

अब हर किसी को अपना बताने लगे हैं ,
लेकिन हमीं से नज़रें चुराने लगे हैं !
अंदाज़ उनकी हर बात का अब नया है ,
लेकिन हमें मतलब समझ आने लगे हैं !
जब से कहानी अपनी सुनाई किसी को ,
सारे ज़माने वाले सताने लगे हैं !
हमने नहीं जाना अब किसी और घर में ,
बस आपके घर आए थे ,जाने लगे हैं !
बेदाग़ कोई आता नज़र अब नहीं है ,
सब आईना औरों को दिखाने लगे हैं !
लिखवा लिया हमने बेवफा नाम ,जब से ,
 "तनहा" हमें आकर आज़माने लगे है !

No comments: