Sunday, 6 January 2013

ग़ज़ल 7 8 ( सब के वादों का न ऐतबार करो ) - लोक सेतिया "तनहा"

सब के वादों का न एतबार करो - लोक सेतिया "तनहा"

सब के वादों का न एतबार करो ,
उनके आने का न इंतज़ार करो।

कुछ नहीं मिलता यहां वफ़ा करके ,
तुम खता ऐसी न बार बार करो।

उसने पूछा था बड़ी अदा से कभी ,
कह दिया हमने , हमें न प्यार करो।

धड़कनों पर ही न इख्तियार रहे ,
इतना तो दिल को न बेकरार करो।

भर के बाहों में उसे था चूम लिया ,
यूं तो ख़्वाबों को न गुनाहगार करो।

बेवफा अहले जहां हुआ "तनहा" ,
तुम वफाएं अब न बार बार करो। 

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