Wednesday, 23 January 2013

ग़ज़ल 5 5 ( फूलों के उसे पैगाम दिये )

फूलों के उसे पैगाम दिये

फूलों के उसे पैग़ाम दिये  ,
जिसने थे ज़हर के जाम दिये।

हर ज़ख्म दिया अपनों ने मुझे ,
कुछ सुबह दिए कुछ शाम दिये।

सूली पे चढ़ा कर खुद हमको ,
हम पर ही सभी इल्ज़ाम दिये।

कल तक था हमारा दोस्त वही ,
ग़म सब जिसने ईनाम दिये।

पागल समझा ,दीवाना कहा ,
दुनिया ने यही कुछ नाम दिये।

हर दर्द दिया यारों ने हमें ,
कुछ ख़ास दिये , कुछ आम दिये।

हीरे थे कई ,   मोती थे कई ,
"तनहा" ने  सभी बेदाम दिये।

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