Monday, 7 January 2013

ग़ज़ल 172 ( तुम सिखाते रहे दोस्ती ) - लोक सेतिया "तनहा"

तुम सिखाते रहे दोस्ती - लोक सेतिया "तनहा"

तुम सिखाते रहे दोस्ती ,
लोग बनते गए अजनबी।

आज हमसे मिले आप जब ,
मिल गई तब हमें ज़िंदगी।

आपने क्या ये जादू किया ,
लूट दिल ले गई सादगी।

हाल ऐसा हमारा हुआ ,
दूर होकर हुए पास भी।

हम मिलेंगे कभी तो कहीं ,
देखनी बस है दुनिया वही।

तुम न होना कभी अब जुदा ,
हमसे वादा करो तुम यही।

आ भी जाओ खुला दर मेरा ,
इक यही बात "तनहा" कही।

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