Friday, 18 January 2013

ग़ज़ल 1 2 6 ( बात पूछो न हम अदीबों की ) - लोक सेतिया "तनहा"

बात पूछो न हम अदीबों की - लोक सेतिया "तनहा"

बात पूछो न हम अदीबों की ,
खाक उड़ जाएगी उमीदों की।

मत चढ़ाना किसी को सूली पर ,
बस यही आरज़ू सलीबों की।

दौलतों से ख़ुशी नहीं मिलती ,
बात झूठी नहीं फकीरों की।

आ गये छोड़ कर पहाड़ों को ,
छांव देखी नहीं चिनारों की।

याद अब तक बहुत सताती है ,
दिलरुबा की हसीं अदाओं की।

बात मेरी भी आज कुछ सुन लो ,
फिर सज़ा दो मुझे गुनाहों की।

चल कहीं और अब चलें "तनहा" ,
जल रही है चिता वफ़ाओं की।  

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