Sunday, 20 January 2013

ग़ज़ल 1 0 0 ( अब हर किसी को अपना बताने लगे हैं ) - लोक सेतिया "तनहा"

अब हर किसी को अपना बताने लगे हैं - लोक सेतिया "तनहा"

अब हर किसी को अपना बताने लगे हैं ,
लेकिन हमीं से नज़रें चुराने लगे हैं।

अंदाज़ उनकी हर बात का अब नया है ,
लेकिन हमें मतलब समझ आने लगे हैं।

जब से कहानी अपनी सुनाई किसी को ,
सारे ज़माने वाले सताने लगे हैं।

हमने नहीं जाना अब किसी और घर में ,
बस आपके घर आए थे , जाने लगे हैं।

बेदाग़ कोई आता नज़र अब नहीं है ,
सब आईना औरों को दिखाने लगे हैं।

लिखवा लिया हमने बेवफा नाम ,जब से ,
"तनहा" हमें आकर आज़माने लगे है।

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