Tuesday, 4 December 2012

ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई ( नज़्म ) 4 3 भाग एक ( डॉ लोक सेतिया )

ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई ,
तसव्वुर में आ आ के मुस्काये कोई !
सराहूं मैं किस्मत को ,जो पास मेरे ,
कभी खुद से घबरा के आ जाये कोई !
वो भूली सी , बिसरी हुई सी कहानी ,
हमें याद आये , जो दोहराये कोई !
ठहर जाए जैसे समां खुशनुमां सा ,
मेरे पास आ कर ठहर जाये कोई !
किसी गुलसितां में खिलें फूल जैसे ,
खबर हमको ऐसी सुना जाये कोई !

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