Friday, 21 December 2012

ग़ज़ल 9 7 ( गये भूल हम जिंदगानी की बातें )

गए भूल हम ज़िन्दगानी की बातें ,
सुनाते रहे बस कहानी की बातें !
तराशा जिन्हें हाथ से खुद हमीं ने ,
हमें पूछते अब निशानी की बातें !
गये डूब जब लोग गहराईयों में ,
तभी जान पाये रवानी की बातें !
रही याद उनको मुहब्बत हमारी ,
नहीं भूल पाये जवानी की बातें !
हमें याद सावन की आने लगी है ,
चलीं आज ज़ुल्फों के पानी की बातें !
गये भूल देखो सभी लोग उसको ,
कभी लोग करते थे नानी की बातें !
किसी से भी "तनहा" कभी तुम न करना ,
कहीं भूल से बदगुमानी की बातें !

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