Wednesday, 5 December 2012

ग़ज़ल 8 ( पूछते सब ये क्या हो गया )

पूछते सब ये क्या हो गया ,
बोलना तक खता हो गया !
आदमी बन सका जो नहीं ,
कह रहा मैं खुदा हो गया !
अब तो मंदिर ही भगवान से ,
लग रहा कुछ बड़ा हो गया !
भीख लेने लगे लगे आजकल  ,
इन अमीरों को क्या हो गया !
नाज़ जिसकी  वफाओं पे था ,
क्यों वही बेवफा हो गया !
दर-ब-दर को दुआ कौन दे ,
काबिले बद-दुआ हो गया !
कुछ न "तनहा" उन्हें कह सका ,
खुद गुनाहगार-सा हो गया !

No comments: