Saturday, 29 December 2012

ग़ज़ल 7 5 ( प्यार की बात मुझसे वो करने लगा )

प्यार की बात मुझसे वो करने लगा ,
दिल मेरा क्यों न जाने था डरने लगा !
मिल के हमने बनाया था इक आशियां ,
है वही तिनका तिनका बिखरने लगा !
दीनो-दुनिया को भूला वही प्यार में ,
जब किसी का मुकद्दर संवरने लगा !
दर्दमंदों की सुन कर के चीखो पुकार ,
है फ़रिश्ता ज़मीं पे उतरने लगा !
जो कफ़स छोड़ उड़ने को बेताब था ,
पर सय्याद उसी के कतरने लगा !
था जो अपना वो बेगाना लगने लगा ,
जब मुखौटा था उसका उतरने लगा !
उम्र भर साथ देने की खाई कसम ,
खुद ही "तनहा" मगर अब मुकरने लगा !

No comments: