Friday, 21 December 2012

ग़ज़ल 6 0 ( शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है )

शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है ,
उनसे मिला दर्द लगता इनायत है !
जीने ही देते न मरने ही देते हैं ,
ये इश्क वालों की कैसी रिवायत है !
करना अगर प्यार ,कर के निभाना तुम ,
देता सभी को वो ,इतनी हिदायत है !
बस आखिरी जाम भर कर अभी पी लें ,
उसने हमें आज दे दी रियायत है !
जिनको हमेशा ही तुम लूटते रहते ,
उनसे ही जाकर के मांगी हिमायत है !
आगाज़ देखा न अंजाम को जाना ,
"तनहा" यही तो सभी की हिकायत है !

No comments: