Thursday, 6 December 2012

ग़ज़ल 3 2 ( क्या अजब हादिसा हो गया )

क्या अजब हादिसा हो गया ,
झूठ सच से बड़ा हो गया !
कश्तियां डूबने लग गई ,
नाखुदाओ ये क्या हो गया !
सच था पूछा ,बताया उसे ,
किसलिये फिर खफ़ा हो गया !
साथ रहने की खा कर कसम ,
यार फिर से जुदा हो गया !
राज़ खुलने लगे जब कई ,
ज़ख्म फिर इक नया हो गया !
हाल अपना बतायें किसे ,
जो हुआ , बस हुआ ,हो गया !
देख हैरान "तनहा" हुआ ,
एक पत्थर खुदा हो गया !

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