Friday, 28 December 2012

ग़ज़ल 11 0 ( हमको जीने के सब अधिकार दे दो )

हमको जीने के सब अधिकार दे दो ,
मरने की फिर सज़ा सौ बार दे दो !
अब तक सारे ज़माने ने रुलाया ,
तुम हंसने के लिए दिन चार दे दो !
पल भर जो दूर हमसे रह न पाता ,
पहले-सा आज इक दिलदार दे दो !
बुझ जाये प्यास सारी आज अपनी ,
छलका कर जाम बस इक बार दे दो !
पर्दों में छिप रहे हो किसलिये तुम ,
आकर खुद सामने दीदार दे दो !
दुनिया ने दूर हमको कर दिया था ,
रहना फिर साथ है इकरार दे दो !
दिल देने आज "तनहा" आ गया है ,
ले लो दिल और दिल उपहार दे दो !

No comments: