Friday, 28 December 2012

ग़ज़ल 1 0 6 ( हमको मिली सौगात है )

हमको मिली सौगात है ,
अश्कों की जो बरसात है !
होती कभी थी चांदनी ,
अब तो अंधेरी रात है !
जब बोलती है खामोशी ,
होती तभी कुछ बात है !
पीता रहे दिन भर ज़हर ,
इंसान क्या सुकरात है !
होने लगी बदनाम अब ,
इंसानियत की जात है !
रोते सभी लगती अगर ,
तकदीर की इक लात है !
"तनहा" कभी जब खेलता ,
देता सभी को मात है !

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