Friday, 28 December 2012

ग़ज़ल 1 6 9 ( बहाने अश्क जब बिसमिल आये )

बहाने अश्क जब बिसमिल आये  ,
सभी कहने लगे पागल आये  !
हुई इंसाफ की बातें लेकिन ,
ले के खाली सभी आंचल आये  !
सभी के दर्द को अपना समझो ,
तुम्हारी आंख में भर जल आये  !
किसी की मौत का पसरा मातम ,
वहां सब लोग खुद चल चल आये  !
भला होती यहां बारिश कैसे ,
थे खुद प्यासे जो भी बादल आये  !
कहां सरकार के बहते आंसू ,
निभाने रस्म बस दो पल आये  !
संभल के पांव को रखना "तनहा" ,
कहीं सत्ता की जब दलदल आये  !

No comments: