Wednesday, 5 December 2012

ग़ज़ल 8 ( पूछते सब ये क्या हो गया ) - लोक सेतिया "तनहा"

पूछते सब ये क्या हो गया - लोक सेतिया "तनहा"

पूछते सब ये क्या हो गया ,
बोलना तक खता हो गया।

आदमी बन सका जो नहीं ,
कह रहा मैं खुदा हो गया।

अब तो मंदिर ही भगवान से ,
लग रहा कुछ बड़ा हो गया।

भीख लेने लगे लगे आजकल  ,
इन अमीरों को क्या हो गया।

नाज़ जिसकी  वफाओं पे था ,
क्यों वही बेवफा हो गया।

दर-ब-दर को दुआ कौन दे ,
काबिले बद-दुआ हो गया।

कुछ न "तनहा" उन्हें कह सका ,
खुद गुनाहगार-सा हो गया। 

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