Friday, 21 December 2012

ग़ज़ल 6 0 ( शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है ) - लोक सेतिया "तनहा"

शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है  - लोक सेतिया "तनहा"

शिकवा नहीं है न कोई शिकायत है ,
उनसे मिला दर्द लगता इनायत है।

जीने ही देते न मरने ही देते हैं ,
ये इश्क वालों की कैसी रिवायत है।

करना अगर प्यार ,कर के निभाना तुम ,
देता सभी को वो , इतनी हिदायत है।

बस आखिरी जाम भर कर अभी पी लें ,
उसने हमें आज दे दी रियायत है।

जिनको हमेशा ही तुम लूटते रहते ,
उनसे ही जाकर के मांगी हिमायत है।

आगाज़ देखा न अंजाम को जाना ,
"तनहा" यही तो सभी की हिकायत है।

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