Tuesday, 4 December 2012

ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई ( नज़्म ) 4 3 भाग एक ( डॉ लोक सेतिया )

 ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई ( नज़्म ) लोक सेतिया 

ख्यालों में रह रह के आये जाये कोई ,
तसव्वुर में आ आ के मुस्काये कोई।

सराहूं मैं किस्मत को ,जो पास मेरे ,
कभी खुद से घबरा के आ जाये कोई।

वो भूली सी , बिसरी हुई सी कहानी ,
हमें याद आये , जो दोहराये कोई।

ठहर जाए जैसे समां खुशनुमां सा ,
मेरे पास आ कर ठहर जाये कोई।

किसी गुलसितां में खिलें फूल जैसे ,
खबर हमको ऐसी सुना जाये कोई। 

No comments: