Friday, 9 November 2012

सुगंध प्यार की ( कविता ) 7 1 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

सुनी हैं हीर रांझा ,
कैस लैला की ,
सबने कहानियां ,
मैंने देखा है ,
दो प्यार करने वालों को ,
खुद अपनी नज़रों से ,
कई बार अपने घर के सामने।
मज़दूरी करना ,
है उनका काम ,
पति पत्नी हैं वो दोनों ,
रहमान और अनीता ,
हैं दोनों के नाम !
पूछो मत  ,
क्या है उनका धर्म ,
देना मत ,
उनके प्यार को ,
ऐसा इल्ज़ाम !
रहमान को देखा ,
मज़दूरी करते हुए ऐसे ,
इबादत हो ,
काम करना जैसे ,
नहीं सुनी उनसे ,
प्यार की बातें कभी ,
करते हैं जैसे ,
सब लोग अक्सर कभी ! !
देखा है मैंने ,
प्यार भरी नज़रों से ,
निहारते ,
अनीता को ,
अक्सर रहमान को  ,
सुना है रहमान को ,
उसका नाम ,
पल पल पुकारते  ! !
निभाती है ,
सुबह से शाम तक ,
उसका साथ ,
न हो चाहे ,
हाथों में उसका हाथ ,
अपने पल्लू से ,
पोंछती रहती ,
उसका पसीना ,
कितना मधुर सा ,
लगता है ,
प्यार भरा एहसास !
कभी कुछ पिलाना ,
कभी कुछ खिलाना ,
कभी लेकर उससे कुदाल,
खुद चलाना ,
कभी गीत प्यार वाले ,
भी गाते नहीं ,
मुहब्बत है तुमसे ,
जताते नहीं ,
नहीं रूठते हैं ,
मनाते नहीं ,
उम्र भर साथ निभाना है ,
नहीं कहता ,
इक दूजे को कोई भी ,
जानते हैं दोनों ,
बताते नहीं !!

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