Saturday, 3 November 2012

ग़म हमारे कोई भुला जाये ( नज़्म ) 4 2 भाग एक ( डॉ लोक सेतिया )

ग़म हमारे कोई भुला जाये  ,
मुस्कुराना हमें सिखा जाये  !
कोई अपना हमें बना जाये  ,
दिल हमारा किसी पे आ जाये  !
ज़िंदगी खुद ही एक दिन चल कर ,
ग़म के मारों से मिलने आ जाये  !
मुस्कुराते हैं फूल कांटों में ,
राज़ इसका कोई बता जाये  !
रह के दिन भर मेरे ख्यालों में ,
रात सपनों में कोई आ जाये  !

No comments: