Wednesday, 28 November 2012

ग़ज़ल 1 6 4 ( हाल अच्छा क्यों रकीबों का है )

हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ,
ये भी शिकवा कुछ अदीबों का है !
मिल रहा सब कुछ अमीरों को क्यों ,
हक बराबर का गरीबों का है !
मांगकर मिलता नहीं छीनो अब  ,
फिर सभी अपने  नसीबों का है !
किसलिये  डरना किसी ज़ालिम से  ,
डर नहीं कोई सलीबों का है !
दर्द गैरों का दिया कुछ "तनहा" ,
और कुछ अपने हबीबों का है !

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