Friday, 16 November 2012

ग़ज़ल 1 6 1 ( बतायें तुम्हें क्या किया हमने )

बतायें तुम्हें क्या किया हमने ,
ज़माने को ठुकरा दिया हमने !
बुझी प्यास अपनी उम्र भर की ,
कोई जाम ऐसा पिया हमने !
तुझे भूल जाने की कोशिश में ,
तेरा नाम हर पल लिया हमने !
नहीं दुश्मनों से गिला करते ,
उन्हें कह दिया शुक्रिया हमने !
पुरानी ग़ज़ल को संवारा है ,
बदल कर नया काफिया हमने !
गुज़ारी है लम्बी उम्र लेकिन ,
नहीं एक लम्हा जिया हमने !
रहा अब नहीं दाग़ तक "तनहा" ,
तेरा ज़ख्म ऐसे सिया हमने !

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