Wednesday, 21 November 2012

अमर कहानी ( कविता ) 7 4 भाग दो

बेहद कठिन है ,
लिखना ,
जीवन की कहानी ,
नहीं आसान होता ,
समझना ,
जीवन को ,
करते हैं  ,
प्रतिदिन संग्राम ,
जीने के लिये  ,
कथाकार की ,
कल्पना जैसा ,
होता नहीं ,
कभी किसी का ,
जीवन वास्तव में ! !
बदलती रहती ,
पल पल परिस्थिति ,
मिलना बिछुड़ना ,
हारना जीतना ,
सुख दुःख जीवन में ,
नहीं सब होता ,
किसी के भी बस में ,
कदम कदम विवशता  ,
आती है नज़र ,
सब कुछ घटता जीवन में ,
देख नहीं पाता कोई भी ,
अनदेखा,
अनसुना भी ,
रह जाता ,
बहुत कुछ है ,
जीत जाता हारने वाला ,
और जीतने वाले ,
की हो जाती हार ,
अक्सर जाती यहां बदल,
उचित अनुचित की परिभाषा ,
किसे मालूम क्या है ,
पूर्ण सत्य जीवन का   ! !
कैसे तय कर सकती है ,
किसी कथाकार की कलम ,
नायक कौन ,
कौन खलनायक ,
जीवन में ,
कहां बच पाता लेखक भी ,
अपने पात्रों के मोह से ,
निष्पक्ष हो ,
समझना होगा ,
जीवन के पात्रों को ,
निभाना होगा ,
कर्तव्य उसे ,
जीवन की कहानी के ,
सभी पात्रों से  ,
न्याय करने का ,
उसकी कलम ,
लिख पाएगी तभी  ,
कोई कालजयी कहानी ,
जो अमर बनी  ,
रहेगी युगों युगों तक !!

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