Saturday, 10 November 2012

मेरी खबर ( कविता ) 7 3 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

पहचाना नहीं ,
आज तुमने मुझे ,
तुम्हें फुर्सत नहीं थी ,
मिलने की ,
करनी थी मुझको ,
जो बातें तुमसे  ,
रहेंगी उम्र भर ,
सब अब अधूरी !!
मगर शायद ,
वर्षों बाद ,
पढ़ कर ,
सुबह का तुम अखबार ,
या सुन कर ,
किसी से  समाचार ,
आओगे घर मेरे ,
तुम भी एक बार ,
ढूंढ कर मेरा ठिकाना !!
मुमकिन है ,
सोचो तब तुम ,
कोई तो दे जाता ,
मैं तुम्हें निशानी ,
काश दोहराते ,
पुरानी हम यादें ,
सुनते-सुनाते ,
जुबां से अपनी ,
नई हम कहानी ! !
मिला है जो ,
जवाब तुमसे अभी ,
वही खुद अपने से ,
मिलेगा तुम्हें कभी ,
नहीं मिल सकूंगा मैं ! !
होगी शायद ,
तुमको भी निराशा ,
होगी खत्म तुम्हारी भी ,
मुझसे मिलने की ,
हर आशा !!
ये सब जीते जी ,
नहीं  कर सकूंगा मैं ,
जो किया है तुमने ,
वो नहीं दोहराऊंगा मैं ,
होगा ऐसा इसलिये  ,
मेरे दोस्त उस दिन ,
क्योंकि मैं ,
अलविदा ,
कह चुका हूंगा ,
दुनिया को ,
और आये होगे ,
तुम मेरे घर पर ,
पढ़कर ,
सुनकर ,
मेरे मरने की खबर !!

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