Friday, 2 November 2012

मन मोहना बड़े झूठे ( हास्य व्यंग्य कविता ) 12 भाग तीन ( डॉ लोक सेतिया )

चेहरे का उनके ,
रंग,
पहले से था काला।
कालिख लगा सका न ,
कोयला घोटाला !
सबक सिखा गया ,
इमानदार अफसर को ,
मुजरिम नहीं ,
मंत्री जी का है साला !
घोटाले करने वाले ,
बरी हो जाएंगे सब ,
हुआ है कभी साबित ,
यहां पर कोई घोटाला !
हुड़दंग करने की ,
संसद में इजाज़त है ,
लगा लो अदालत में ,
मुहं पर मगर ताला !
फ़िल्मी सितारों से ,
डाकू लुटेरों तक ,
सत्ता की राजनीति  ,
सब की हो गई खाला !
मनमोहन कहते ,
डरना न आरोपों से ,
दिन चार बाद ,
होगा ही अब उठाला !
भाई भाई हैं  ,
पक्ष-विपक्ष के सब नेता ,
खंजर भी छिपा है ,
हाथों में है फूलमाला !
वो भी बिके हुए ,
ये भी बिके हुए ,
दोनों को चलाता सदा ,
इक ही पैसे वाला ! 

No comments: