Wednesday, 28 November 2012

ग़ज़ल 1 6 4 ( हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ) - लोक सेतिया "तनहा"

हाल अच्छा क्यों रकीबों का है - लोक सेतिया "तनहा"

हाल अच्छा क्यों रकीबों का है ,
ये भी शिकवा कुछ अदीबों का है।

मिल रहा सब कुछ अमीरों को क्यों ,
हक बराबर का गरीबों का है।

मांगकर मिलता नहीं छीनो अब  ,
फिर सभी अपने  नसीबों का है।

किसलिये  डरना किसी ज़ालिम से  ,
डर नहीं कोई सलीबों का है।

दर्द गैरों का दिया कुछ "तनहा" ,
और कुछ अपने हबीबों का है।

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