Monday, 12 November 2012

ग़ज़ल 1 3 6 ( इसी जहाँ में सभी का जहान होता है ) - लोक सेतिया "तनहा"

इसी जहां में सभी का जहान होता है - लोक सेतिया "तनहा"

इसी जहां में सभी का जहान होता है ,
नई ज़मीन नया आसमान होता है।

वही ज़माना फिर आ गया कहीं वापस ,
कभी कभी तो हमें यूं गुमान होता है।

लिखा हुआ तो बहुत है किताब में लेकिन ,
अमल जो कर के दिखाए महान होता है।

वहीं मसल के किसी ने हैं फेंक दी कलियां ,
जहां सजा के रखा फूलदान होता है।

जो दर्द लेकर खुशियां सभी को देता हो ,
वो आदमी खुद गीता कुरान होता है।

चलो तुम्हें हम घर गांव में दिखा देंगे ,
यहां शहर में तो केवल मकान होता है।

नया परिंदा आकाश में लगा उड़ने ,
ये देखता "तनहा" खुद उड़ान होता है।

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