Wednesday, 24 October 2012

क्यों परेशान हूँ ( कविता ) 6 1 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

मन है उदास क्यों ,
जा रहा हूं  मैं किधर ,
ढूंढ रहा हूं किसको   ,
चाहिए क्या मुझे ,
कहां है मेरी मंज़िल  ,
कैसी हैं राहें मेरी ,
प्रश्न ही प्रश्न हर तरफ ,
आ रहे हैं मुझको नज़र ,
नहीं कहीं कोई भी जवाब !!
जीवन की सारी खुशियां ,
कहां मिलेंगी सबको ,
खिलते हैं फूल ऐसे कहां ,
जो मुरझाते नहीं फिर कभी ,
कहां हैं वो सब लोग ,
जो बांटते हों सिर्फ प्यार ,
कहीं तो होगा वो आंगन ,
जिसमें न हो कोई दीवार !!
कहां है दुनिया वो ,
जिसकी है मुझको तलाश ,
कोई तो मिलेगा मुझे कभी ,
और देगा उसका पता मुझे ,
एक प्रश्न चिन्ह बन गया ,
जीवन है मेरा ,
बता दो कोई तो मुझे ,
क्या है मेरा जवाब !!

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