Wednesday, 10 October 2012

जाँच आयोग ( हास्य व्यंग्य कविता ) 9 भाग तीन - डॉ लोक सेतिया

काम नहीं था ,
दाम नहीं था ,
वक़्त बुरा था आया ,
ऐसे में देर रात ,
मंत्री जी का संदेशा आया ,
घर पर था बुलाया !
नेता जी ने अपने हाथ से उनको ,
मधुर मिष्ठान खिलाया ,
बधाई हो अध्यक्ष ,
जांच आयोग का तुम्हें बनाया !
खाने पीने कोठी कार ,
की छोड़ो चिंता ,
समझो विदेश भ्रमण का ,
अब है अवसर आया !
घोटालों का शोर मचा ,
विपक्ष ने बड़ा सताया ,
नैया पार लगानी तुमने ,
सब ने हमें डुबाया !
जैसे कहें आंख मूंद ,
सब तुम करते जाना ,
रपट बना रखी हमने ,
बिलकुल न घबराना !
बस दो बार ,
जांच का कार्यकाल बढ़ाया ,
दो साल में रपट देने का ,
जब वक़्त था आया !
आयोग ने मंत्री जी को ,
पाक साफ़ बताया ,
उसने व्यवस्था को ,
घोटाले का दोषी पाया !
लाल कलम से ,
फाइलें कर कर काली ,
खोदा पर्वत सारा ,
और चुहिया मरी निकाली !!       

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