Thursday, 25 October 2012

इश्क का हो इज़हार , बहुत मुश्किल है ( नज़्म ) 3 6 भाग एक ( डॉ लोक सेतिया )

इश्क का हो इज़हार ,बहुत मुश्किल है ,
दुहरी इस की धार ,बहुत मुश्किल है !
जीत न पाया दिल के खेल में कोई ,
जीत के भी है हार ,बहुत मुश्किल है !
हो न अगर दीदार तो घबराये दिल ,
होने पर दीदार बहुत मुश्किल है !
इस को खेल न तुम बच्चों का जानो ,
दुनिया वालो प्यार बहुत मुश्किल है !
इश्क का दुश्मन है ये ज़माना लेकिन ,
कोई नहीं है यार ,बहुत मुश्किल है !
तूने किसी का दिल तोड़ा है बेदर्दी ,
टुकड़े हुए हैं हज़ार ,बहुत मुश्किल है !
प्यार तो अफसाना है एक नज़र का ,
होता है एक ही बार ,बहुत मुश्किल है !
देर से आने की है उनकी आदत ,
हम हैं इधर बेज़ार ,बहुत मुश्किल है !
कहते हैं वो तुम बिन मर जाएंगे ,
जां देना ,सरकार ,बहुत मुश्किल है !

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