Monday, 22 October 2012

गर्दिश में मुझे यूँ छोड़ के जाने वाले ( नज़्म ) 3 2 भाग एक ( डॉ लोक सेतिया )

गर्दिश में मुझे यूं छोड़ के जाने वाले
ले ,छोड़ गए तुझको भी ज़माने वाले !
मुझको भी आया अब तो आंसू पीना ,
तेरा अहसां है मुझको रुलाने वाले !
होने वाले वो कब हैं किसी के यारो ,
बाज़ार मुहब्बत का ये सजाने वाले !
हो कर बेज़ार ये आखिर क्यों रोते हैं ,
खुद कर के सितम यूं हमको सताने वाले !
यूं तो रह जाते न हम सब "तनहा"
जो न रूठे होते वो हमको मनाने वाले !

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