Friday, 12 October 2012

मेरा दिल वो बातें भुलाने लगा है ( नज़्म ) डॉ लोक सेतिया 2 5 भाग एक

मिरा दिल वो बातें भुलाने लगा है - लोक सेतिया "तनहा"

मिरा दिल वो बातें भुलाने लगा है ,
सुकूं सा मुझे अब तो आने लगा है।

कोई फूल तन्हा ज़रा देर खिलकर ,
बहारों में मुरझाया जाने लगा है।

उसे भूल जाऊं ये कसमें दिलाकर ,
गया ,जो वो फिर याद आने लगा है।

ख्यालों में ,ख़्वाबों में रह-रह के हमको ,
तुम्हारा तस्व्वुर सताने लगा है।

कभी हमने-तुमने जो गाया था मिलकर ,
वही गीत दिल गुनगुनाने लगा है। 

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