Thursday, 20 September 2012

भाग्य लिखने वाले ( कविता ) 3 8 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

विधाता हो तुम ,
लिखते हो ,
सभी का भाग्य  ,
जानता नहीं कोई ,
क्या लिख दिया तुमने ,
किसलिए ,
किस के भाग्य में  ! !
सब को होगी तमन्ना ,
अपना भाग्य ,
जानने की ,
मुझे नहीं जानना ,
क्या क्यों लिखा तुमने  ,
मेरे नसीब में लेकिन ,
कहना है तुमसे यही  ! !
भूल गये लिखना ,
वही शब्द क्यों  ,
करना था प्रारम्भ जिस से ,
लिखना नसीबा मेरा !!
तुम चाहे जो भी ,
लिखो किसी के भाग्य में  ,
याद रखना,
हमेशा ही लिखना एक शब्द ,
प्यार ,मुहब्बत ,स्नेह ,प्रेम !!
मर्ज़ी है तुम्हारी दे दो चाहे  ,
जीवन की सारी खुशियां ,
या उम्र  भर केवल तड़पना ,
मगर लिख देना ,
सभी के भाग्य में  ,
अवश्य यही एक शब्द ,
प्यार ,प्यार सिर्फ प्यार !!

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