Friday, 21 September 2012

ख़त ( कविता ) 2 3 भाग एक ( डॉ लोक सेतिया )

फिर मिलें हम दुआ करते थे ,
जब कभी ख़त लिखा करते थे !
प्यार करते हमें तुम कितना  ,
यूं कभी कह दिया करते थे !
ख्वाब जैसी बना इक दुनिया ,
खुद वहां रह लिया करते थे !
रूठ जाना मनाते रहना ,
और क्या हम किया करते थे !
दूर से देखते रहते पर ,
पास हों जब हया करते थे !
प्यार में रख दिये जो हमने ,
नाम अच्छे लगा करते थे !
ख़त हमें रोज़ लिखना "तनहा"  ,
कौन मुझको कहा करते थे !            

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