Wednesday, 5 September 2012

ग़ज़ल 9 1 ( लिखी फिर किसी ने कहानी वही है )

लिखी फिर किसी ने कहानी वही है ,
मुहब्बत की हर इक निशानी वही है !
सियासत में देखा अजब ये तमाशा ,
नया राज है और रानी वही है !
हमारे जहां में नहीं कुछ भी बदला ,
वही चोर , चोरों की नानी वही है !
जुदा हम न होंगे जुदा तुम न होना ,
हमारे दिलों ने भी ठानी वही है  !
कहां छोड़ आये हो तुम ज़िंदगी को ,
बुला लो उसे ज़िंदगानी वही है !
खुदा से ही मांगो अगर मांगना है ,
भरे सब की झोली जो दानी वही है !
घटा जम के बरसी , मगर प्यास बाकी ,
बुझाता नहीं प्यास , पानी वही है  ! 

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