Sunday, 16 September 2012

ग़ज़ल 3 6 ( जो देश में हो वो होने दो )

जो देश में हो वो होने दो ,
पहरेदारों को सोने दो !
कानून उधर काम अपना करे ,
अपराध इधर कुछ होने दो !
लोग उनको झुक के सलाम करें ,
ये नशा भी उनको होने दो !
तब होगा बचाव का काम शुरू ,
घर बाढ़ को और डुबोने दो !
वो कुछ न हकीक़त जान सकें ,
ख्वाबों में उन्हें तो खोने दो !
रहने दो न क़त्ल का कोई निशां ,
उन्हें खून के धब्बे धोने दो !
क्यों फ़िक्र है इतनी जनता की ,
जनता रोती है , रोने दो   !

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