Tuesday, 18 September 2012

ग़ज़ल 1 2 4 ( क्या बतायें तुम्हें लोग क्या हो गये )

क्या बतायें तुम्हें लोग क्या हो गये  ,
आदमी थे वो सब जो खुदा हो गये  !
सब हमारा ये अंजाम देखा किये ,
हम हमेशा नई इब्तिदा हो गये  !                               ( इब्तिदा = शुरुआत )
क्या हुआ था हमें , हम नहीं जानते ,
बस उन्हें देख कर हम फ़िदा हो गये  !
जब सुनाने लगे हम कहानी नई ,
छोड़ महफ़िल सभी अलविदा हो गये  !
हर नज़र आपको देखती रह गई ,
आप सब को लुभाती अदा हो गये  !
उनकी नज़रों के सब जाम पीते रहे ,
वो पिलाते रहे मयकदा हो गये  !                        ( मयकदा =शराबखाना )
जिनको आया नहीं मांगने का हुनर ,
अनसुनी रह गई इक सदा हो गये  !                           ( सदा =प्रार्थना )
खुद बनाया कभी था हसीं कारवां ,
छोड़ कर खुद ही "तनहा" जुदा हो गये  !

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