Thursday, 13 September 2012

आंधियां चलती रहीं , दीप जलता ही रहा ( गीत ) 7 ( डॉ लोक सेतिया )

                                                (   दीप जलता ही रहा  )
आंधियां चलती रहीं ,दीप जलता ही रहा !
ज़िंदगी के फासले कम कभी हो न सके /
दर्द तो मिलते रहे हम मगर रो न सके /
ग़म से पैमाना भरा जब न खाली हो सका /
वो समंदर बन गया बस उछलता ही रहा !
आंधियां चलती ........................
पूछते सब से रहे आपका हम तो पता /
है हमारा ख्वाब कोई तो देता ये बता /
छोड़ कर हम कारवां आ गए खुद ही यहां /
इक सफ़र था ज़िंदगी जो कि चलता ही रहा !
आंधियां चलती ...........................
जब किसी ने साथ छोड़ा ,नहीं कुछ भी कहा /
शुक्रिया आपका आपने जो भी दिया /
जब भी वो देता रहा जाम भर भर के हमें /
जाम हाथों से मेरे बस फिसलता ही रहा !
आंधियां चलती ............................
पास हमको लोग सारे बुलाते तो रहे /
और हम रस्मे वफा कुछ निभाते तो रहे /
दिल हमारा तोड़ डाला किसी ने जब भी /
आंसुओं का एक सागर निकलता ही रहा !
आंधियां चलती रहीं ,दीप जलता ही रहा !!
              

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