Sunday, 16 September 2012

ग़ज़ल 8 6 ( पूछा उन्हें जाना किधर चाहते हैं ) - लोक सेतिया "तनहा"

पूछा उन्हें जाना किधर चाहते हैं - लोक सेतिया "तनहा"

पूछा उन्हें जाना किधर चाहते हैं ,
कहने लगे बनना खबर चाहते हैं।

जिस आशियां को बेच डाला कभी था ,
अब फिर वही प्यारा सा घर चाहते हैं।

इस शहर की करते शिकायत सभी से ,
आ कर यहीं रहना मगर चाहते हैं।

कुछ भी नहीं चाहा किसी से कभी भी ,
बस धूप  में कोई शजर चाहते हैं।       ( शजर ::: पेड़ )

मांगें जो मिल जाये वही ज़िंदगी से ,
सब लोग कुछ ऐसा हुनर चाहते हैं।

खोना पड़ेगा आपको कुछ तो पहले ,
पाना यहां सब कुछ अगर चाहते हैं।

मिलते ही जैसे पा लिया था सभी कुछ ,
"तनहा" वही पहला असर चाहते हैं।

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