Wednesday, 26 September 2012

कोई ( कविता ) 4 5 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

कोई है धड़कन दिल की
कोई राहों की है धूल  !
कोई शाख से टूटा पत्ता
कोई डाली पे खिला फूल !!
कोई आंसू मोती जैसा
कोई हो जैसे कि पानी !
कोई आज के दौर की चर्चा
कोई भूली हुई कहानी !!
कोई कविता ग़ज़ल हो जैसे
कोई बीते कल का अखबार !
कोई कहीं पर डूबी नैया
कोई माझी संग पतवार !!
कोई सूना आंगन मन का
कोई है दिल का अरमान  !
कोई अपने घर को भूला
कोई घर घर का महमान !!
कोई नहीं कभी बिकता है
कोई बताता अपना दाम !
कोई है आगाज़ किसी का
कोई किसी का है अंजाम !!

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