Monday, 24 September 2012

ऐसा भी कोई तो हो ( कविता ) 4 4 भाग दो ( डॉ लोक सेतिया )

अपना ले जो मुझे ,
मैं जैसा भी हूं ! !
हर दिन मुझको ,
न करवाए एहसास ,
मेरी कमियों का बार बार ! !
सोने चांदी से नहीं ,
धन दौलत से नहीं ,
प्यार हो जिसको इंसान से,
इंसानियत से ! !
जिसको आता ही न हो,
मेरी ही तरह ,
दुनिया का लेन-देन का ,
कोई कारोबार ! !
थाम कर जो ,
फिर छोड़ जाए न कभी साथ  ,
रिश्ते-नातों को ,
जो समझे न इक व्योपार ,
जिसको आता हो ,
बहाना आंसू ,
हर किसी के दुःख दर्द में  ! !
नफरत न हो जिसे ,
अश्क बहाने से ,
जिसमें बाकी हों ,
मानवता की संवेदनाएं ,
जन्म जन्म से ढूंढ रहा हूं ,
उसी को मैं  !!     

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